Home उत्तराखंड सड़क सुविधा न होने के चलते, डंडी के माध्यम से पहुंचाया अस्पताल

सड़क सुविधा न होने के चलते, डंडी के माध्यम से पहुंचाया अस्पताल

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चमोली। एक ओर देश डिजिटल इंडिया और आधुनिकता की उड़ान भर रहा है, वहीं चमोली जनपद के दशोली विकासखंड के अंतर्गत निजमुला घाटी का मौली हडूंगा गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। आजादी के  वर्षों बाद भी यह गाँव सड़क मार्ग से नहीं जुड़ सका है, जिसके चलते यहाँ के ग्रामीणों का जीवन आज भी ‘तीसरी दुनिया’ जैसा कष्टप्रद बना हुआ है।

शनिवार सुबह गाँव में हुई एक दुखद घटना ने शासन-प्रशासन के विकास के दावों की एक बार फिर पोल खोल दी है।  हडूंगा गाँव निवासी  गुड्डी देवी पत्नी  वीरेंद्र सिंह रोज़ाना की तरह जंगल में चारा-पत्ती लेने गई थीं। इसी दौरान पेड़ से अनियंत्रित होकर गिरने के कारण वह गंभीर रूप से चोटिल हो गईं।

गाँव तक सड़क न होने के कारण घायल महिला को अस्पताल पहुँचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायल गुड्डी देवी को डंडी-कंडी (पालकी) के सहारे ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए 8 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुँचाया। सड़क पर पहुँचने के बाद 108 एम्बुलेंस के माध्यम से उन्हें जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है।

 प्रकृति की गोद में उपेक्षित गाँव प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर होने के बावजूद मौली हडूंगा विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर है। ग्राम प्रधान मौली हडूंगा भगत फर्स्वाण का कहना है कि सड़क के अभाव में गाँव न केवल स्वास्थ्य सेवाओं से कटा हुआ है, बल्कि पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी बदतर है

ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सीमांत क्षेत्र के इस सबसे दूरस्थ गाँव की सुध लेने वाला कोई नहीं है। बीमार और बुजुर्गों के लिए यह 8 किलोमीटर का पैदल रास्ता किसी सजा से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस हादसे के बाद प्रशासन की नींद खुलती है या मौली हडूंगा के लोग यूँ ही डंडी-कंडी के भरोसे अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे।