चमोली। गोपेश्वर गांव के पौराणिक मंदिरों के 100 मीटर दायरे में निर्माण एवं मरम्मत कार्यों पर लगी रोक से नाराज़ ग्रामीण बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए नियमों में व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की।
स्थानीय निवासी नवल भट्ट ने बताया कि पुरातत्व विभाग द्वारा पौराणिक मंदिरों के 300 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण और मरम्मत कार्य पर रोक लगाई गई है। भवन निर्माण की अनुमति के लिए लोग प्राधिकरण में आवेदन कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय से उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है। इससे ग्रामीणों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
गांव की वरिष्ठ नागरिक सुशीला सेमवाल ने कहा कि वे गोपेश्वर गांव की मूल निवासी हैं और उनके घर वर्षों पुराने हैं। समय के साथ ये मकान जर्जर हो चुके हैं तथा उनकी मरम्मत अत्यंत आवश्यक है। लेकिन वर्तमान नियमों के कारण वे अपने ही घरों की मरम्मत और निर्माण नहीं करा पा रही हैं, जिससे परिवारों के सामने कठिनाई उत्पन्न हो गई है।
राज्य आंदोलनकारी चंद्रकला बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के गठन के लिए लोगों ने कठिन संघर्ष किया था ताकि पहाड़ के लोगों को अपने क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लेकिन आज ऐसे नियमों के कारण मूल निवासी अपने ही गांव में मकानों का निर्माण और मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण हो रहे हैं, जिन पर प्रशासन पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा, जबकि मूल निवासियों को नियमों के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पौराणिक धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की मूलभूत जरूरतों को भी ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे वे अपने पुराने मकानों की मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्य कर सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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