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एकीकृत कृषि मॉडल से संवर रही आजीविका, ग्रामोत्थान परियोजना से विजया देवी बनीं आत्मनिर्भर

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चमोली :जनपद चमोली के विकासखंड पोखरी की प्रगतिशील एवं नवाचारी कृषक विजया देवी ने एकीकृत कृषि पद्धति अपनाकर आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से उन्होंने परंपरागत कृषि गतिविधियों को विविधीकृत करते हुए सब्जी उत्पादन, पुष्प उत्पादन, एग्रोफोरेस्ट्री और कीवी उत्पादन को एक ही कृषि मॉडल में शामिल किया है। इन विविध कृषि गतिविधियों के माध्यम से वह प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। उनका यह प्रयास न केवल आय के विविध स्रोत विकसित करने का उदाहरण है, बल्कि टिकाऊ कृषि और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में भी प्रेरणादायी है।

विजया देवी द्वारा वर्षभर विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। इससे जहां परिवार की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है, वहीं नियमित आय अर्जित करने के अवसर भी बढ़े हैं। इसके साथ ही पुष्प उत्पादन को अपनाकर उन्होंने कृषि से अतिरिक्त आय की संभावनाएं विकसित की हैं। एग्रोफोरेस्ट्री के माध्यम से वह भूमि की उर्वरता बनाए रखने, मृदा एवं नमी संरक्षण तथा कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी कार्य कर रही हैं। वहीं, कीवी उत्पादन उनके कृषि मॉडल का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उच्च मूल्य वाली फसल के रूप में उनकी आय बढ़ाने में सहायक बन रहा है।

कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने और उनकी उपयोगिता बढ़ाने के उद्देश्य से विजया देवी ने कीवी के प्रसंस्करण की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। वह कीवी से जैम एवं अचार जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर रही हैं। इस पहल से ताजे फल के अतिरिक्त प्रसंस्कृत उत्पादों के माध्यम से आय अर्जित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। साथ ही, यह प्रयास स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित लघु उद्यम विकसित करने और उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत विजया देवी को ₹75,000 की सहायता राशि तथा ₹1,50,000 का ऋण प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने संसाधनों से ₹93,500 का निवेश कर कृषि गतिविधियों का विस्तार किया। इस प्रकार परियोजना से प्राप्त सहयोग और स्वयं के निवेश के माध्यम से उन्होंने अपने कृषि कार्य को अधिक व्यवस्थित एवं विविधीकृत स्वरूप दिया है।

कृषि प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और एकीकृत कृषि पद्धतियों से संबंधित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रतिभाग कर उन्होंने अपने ज्ञान एवं कौशल को भी विकसित किया। प्रशिक्षण के माध्यम से प्राप्त जानकारी का उपयोग करते हुए वह कृषि उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं आय के नए अवसरों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं।

एकीकृत कृषि मॉडल अपनाने से विजया देवी को आय के विविध स्रोत विकसित करने, किसी एक फसल पर निर्भरता कम करने तथा उपलब्ध कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिली है। सब्जी, फूल, कीवी और एग्रोफोरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ जोड़कर उन्होंने कृषि को अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने का प्रयास किया है। विभिन्न कृषि गतिविधियों के समन्वय से प्रतिमाह लगभग 25 हजार रुपये की आय अर्जित करना उनकी मेहनत, नवाचार और योजनाबद्ध कृषि प्रबंधन का परिणाम है। उनका यह प्रयास विकासखंड पोखरी सहित जनपद के अन्य कृषकों, विशेषकर महिला कृषकों, के लिए प्रेरणादायी है।

भविष्य में विजया देवी कीवी से तैयार होने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों की श्रृंखला का विस्तार करने, नई प्रसंस्करण गतिविधियां अपनाने तथा आसपास के किसानों के साथ अपने अनुभव एवं जानकारी साझा करने की योजना बना रही हैं। उनका उद्देश्य कृषि को केवल आजीविका का साधन न रखकर एक स्थायी, आत्मनिर्भर और लाभकारी उद्यम के रूप में विकसित करना है।