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विकसित उत्तराखंड के संवाद में चमके चमोली के दो चेहरे, हर्बल उत्पादों से लेकर औषधीय खेती तक बनाई पहचान

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की चमोली के राजेश और डॉ. हरपाल नेगी के प्रयासों की सराहना, पलायन रोकने और स्थानीय रोजगार सृजन की मिसाल बने
चमोली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित ‘विकसित उत्तराखण्ड–यात्रा जारी है’ संवाद कार्यक्रम में चमोली जनपद के दो लोगों ने अपने नवाचार और स्वरोजगार के प्रयासों से प्रदेश का ध्यान आकर्षित किया। चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी सहित अन्य हर्बल उत्पादों के माध्यम से रिवर्स पलायन की मिसाल पेश की, वहीं डॉ. हरपाल नेगी ने घेस क्षेत्र में कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों के लिए आय के नए अवसर विकसित किए हैं।
शनिवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में नियोजन विभाग और देवभूमि डायलॉग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर के उद्यमियों, नवाचारकर्ताओं, प्रगतिशील किसानों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने प्रतिभागियों के अनुभव सुने और उनके प्रयासों की सराहना की।
डॉ. हरपाल नेगी ने मुख्यमंत्री को बताया कि घेस क्षेत्र में औषधीय वनस्पतियों के उत्पादन के लिए स्थानीय लोगों को प्रोत्साहित किया गया है। वर्तमान में 300 से अधिक लोग इस कार्य से जुड़े हैं और सामूहिक रूप से करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। औषधीय पौधों के उत्पादन से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ रहे हैं।
वहीं, चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी और अन्य हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में काम शुरू किया। उनके प्रयासों से स्थानीय लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। पहाड़ में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय उत्पादों को आजीविका का माध्यम बनाकर उन्होंने स्वरोजगार और रिवर्स पलायन की दिशा में उल्लेखनीय पहल की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में उत्तराखंड के युवाओं, उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य सरकार पर्यटन, ऊर्जा, कृषि, उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या लगभग 700 से बढ़कर 1700 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कमी नहीं है। नवाचार, स्थानीय उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में चम्पावत, उत्तरकाशी, पौड़ी, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और टिहरी सहित विभिन्न जनपदों के उद्यमियों और प्रगतिशील लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे अभिनव प्रयास दूसरे लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सरकार का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें रोजगार सृजन के लिए भी प्रोत्साहित करना है।