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बाल रोग विभाग में डीएनबी पीजी डिग्री कोर्स की 02 सीटों की मिली स्वीकृति।

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बाल रोग विभाग में डीएनबी पीजी डिग्री कोर्स की 02 सीटों की मिली स्वीकृति। अब श्रीनगर मेडिकल कॉलेज मे पी. जी. सीटो की कुल संख्या हुई 52

9 नवम्बर 2023 को किया था एनबीई की टीम ने सीटों को लेकर निरीक्षण

बाल रोग विभाग में डीएनबी ( डिप्लोमा ) पीजी कोर्स की 04 सीटों पर पूर्व में मिल चुकी है स्वीकृति

श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में डीएनबी (डिग्री) पीजी कोर्स के लिए बाल रोग विभाग में दो सीटों के लिए एनबीई ने स्वीकृति दी है। दो सीटों पर स्वीकृति मिलने से बाल रोग विभाग में डिग्री कोर्स शुरु होने से प्रदेश के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैयार होगे। बाल रोग विभाग के लिए पीजी कोर्स के लिए दो सीटों पर स्वीकृति मिलने पर विभाग व संस्थान ने खुशी जाहिर की है। अब श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों में पीजी सीटो की कुल संख्या 52 हो चुकी है।
बता दें कि डीएनबी डिग्री कोर्स की स्वीकृति हेतु 9 नवम्बर 2023 को एनबीई टीम के सदस्य ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज फरीदाबाद के बाल रोग विभाग के डॉ. आरएन मंडल ने बाल रोग विभाग का निरीक्षण किया था। जिसमें उनके द्वारा बाल रोग विभाग में भर्ती बच्चों के साथ ही उनके परिजनों से स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी लेने के साथ ही निक्कू वार्ड सहित अस्पताल के तमाम बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के संदर्भ में औचक निरीक्षण किया था। नवम्बर माह में हुए निरीक्षण के बाद एनबीई ने बाल रोग विभाग में डीएनबी पीजी डिग्री कोर्स के लिए दो सीटों की अनुमति दे दी है। जो कि बाल रोग विभाग के लिए अच्छी खबर है। पीजी कोर्स के लिए पीजी रेजिडेंट चिकित्सक मिलने से बेस चिकित्सालय में मरीजों के इलाज में गुणात्मक इजाफा होगा । पीजी में प्रवेश लेने के लिए उत्तराखंड ही नहीं पूरे भारतवर्ष के विभिन्न प्रदेशों से यहां पीजी करने के लिए डॉक्टर आ रहे है। जिससे मेडिकल कॉलेज प्रदेश के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर तैयार करने में अपनी मुख्य भूमिका अदा करेगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएम रावत ने कहा कि एनबीई ने मेल भेजकर सीटों की स्वीकृति का लेटर भेजा है। जो कि मेडिकल कॉलेज के लिए अच्छी खबर है। मेडिकल कॉलेज के विभागों में राज्य सरकार के प्रयासों से आज मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा संसाधन बढ़े ही, साथ ही फैकल्टी की कमी मे काफी हद तक सुधार हुआ है। जिससे आज मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों में लगातार पीजी कोर्स संचालित करने के लिए सीटों की स्वीकृति मिल रही है।