Home उत्तराखंड समाज की संवेदना को जगाता है मुंशी प्रेमचंद का साहित्य

समाज की संवेदना को जगाता है मुंशी प्रेमचंद का साहित्य

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गोपेश्वर:राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर में आज प्रख्यात हिंदी कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 143वीं जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई गई। हिंदी विभाग, अंग्रेजी विभाग एवं अजीम प्रेमजी संस्थान के संयुक्त तत्तावधान में आयोजित इस समारोह में प्रतिभागियों ने प्रेमचंद के साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

समारोह को संबोधित करते हुए हिंदी विभाग प्रभारी डॉ भावना मेहरा ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी कहानियों एवं कविताओं के माध्यम से समाज की विभिन्न बुराइयों को रेखांकित किया एवं उनको मनोवैज्ञानिक तौर पर सुलझाने का सुझाव भी दिया।

अंग्रेजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दर्शन सिंह नेगी ने कहा कि प्रेमचंद्र आज के परिप्रेक्ष्य में एक अंतरराष्ट्रीय कहानीकार एवं कथाकार हैं क्योंकि उनकी रचनाएं देश, काल एवं भाषाई सीमा से ऊपर पूरे मानव समाज के कल्याण की बात करती हैं। इसलिए उनके साहित्य का दुनिया की बीस से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है।

हिंदी विभाग की डॉ संध्या गैरोला ने कहा कि प्रेमचंद्र समाज के गरीबों, किसानों, दलितों एवं वंचितों की एक सशक्त आवाज थे।

बीएड विभाग के डॉ कुलदीप नेगी ने कहा कि प्रेमचंद्र का साहित्य मानवीय संवेदना को झकझोरने का कार्यकर्ता है।

अंग्रेजी विभाग के डॉ दिनेश पंवार ने प्रेमचंद की गोदान, गबन कफन, कर्मभूमि, रंगभूमि आदि कृतियों को उद्धृत करते हुए समाज सुधार में प्रेमचंद्र के साहित्य के योगदान पर प्रकाश डाला।

प्रतिभागियों ने समारोह में प्रेमचंद्र की विभिन्न कहानियों का वाचन किया जिसमें प्रमुख तौर पर किशन सिंह ने प्रेमचंद के साहित्य में नैतिकता, हेमलता ने प्रेमचंद्र की जीवनी, प्रियंका ने गिल्ली डंडा कहानी, पवन कुमार ने दूध का दाम कहानी, पवन सिंह ने ईदगाह कहानी, प्राची तिवारी ने प्रेमचंद्र का जीवन संघर्ष, सोनिया ने दो बैलों की जोड़ी आदि कहानियों का वाचन किया।

इस अवसर पर अजीम प्रेमजी संस्थान की मीनाक्षी, विवेक, गिरीश, रोशनी आदि उपस्थित रहे।