देहरादून। बदरीनाथ धाम से सहस्त्रधारा आ रहा ट्रांस भारत कंपनी का एक सिविल हेलीकॉप्टर शुक्रवार दोपहर चमोली जिले के हाथी पर्वत क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका जताई गई है। हेलीकॉप्टर में पांच यात्री और एक पायलट सहित कुल छह लोग सवार थे। घटना की सूचना मिलते ही राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने तथा सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री स्वयं पूरे घटनाक्रम और बचाव अभियान की लगातार निगरानी कर रहे हैं। वहीं, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने भी अधिकारियों से जानकारी लेकर सभी बचाव एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के अनुसार, शुक्रवार अपराह्न करीब दो बजे जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी चमोली को हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका संबंधी सूचना मिली। सेना की सिग्नल सेंटर टीम ने संबंधित क्षेत्र में हेलीकॉप्टर से धुआं उठते और उसे तेजी से नीचे की ओर जाते हुए देखा था। इसके बाद तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया।
घटनास्थल तक पहुंचने और हेलीकॉप्टर में सवार लोगों की तलाश के लिए सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें रवाना की गई हैं। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के एक रेकी हेलीकॉप्टर और एक रिट्रीवर हेलीकॉप्टर के माध्यम से क्षेत्र की हवाई रेकी भी की जा रही है। सहस्त्रधारा से एसडीआरएफ की एक अतिरिक्त टीम भी रवाना की गई है।
संभावित घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एम्स ऋषिकेश, बेस अस्पताल श्रीनगर और संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। चिकित्सा दलों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव गृह शैलेश बगोली और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र देहरादून से विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर अभियान की निगरानी की जा रही है। आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और सवार लोगों तक पहुंचने के लिए जमीनी और हवाई दोनों माध्यमों से प्रयास जारी हैं।
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