उत्तरकाशी:
चीन सीमा से लगे देश के तीसरे सबसे बड़े गंगोत्री नेशनल पार्क की नेलांग घाटी अब केवल आठ माह नहीं, बल्कि पूरे बारह महीने पर्यटकों के लिए खुली रहेगी। शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शासन के निर्देश पर वन विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है, जिसके तहत सर्दियों में भी पर्यटन गतिविधियां सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से संचालित की जाएंगी।
अब तक हर वर्ष 30 नवंबर को पार्क के गेट बंद कर दिए जाते थे, जिसके बाद गंगोत्री-गोमुख ट्रैक, केदारताल, गरतांग गली और नेलांग घाटी जैसे क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित हो जाता था। लेकिन नई व्यवस्था के तहत भैरोंघाटी से नेलांग तक 23 किमी और नेलांग से नागा तक 7 किमी, कुल 30 किमी क्षेत्र शीतकाल में भी पर्यटकों के लिए खुला रहेगा।
“छोटा लद्दाख” के नाम से प्रसिद्ध नेलांग घाटी में अब सर्दियों में भी पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे। इससे पार्क के राजस्व में वृद्धि के साथ स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, हालांकि वन्यजीवों और उनके आवास की सुरक्षा एक चुनौती बनी रहेगी।
एसओपी के अनुसार शीतकाल में प्रतिदिन अधिकतम 100 पर्यटकों और 20 वाहनों को ही प्रवेश दिया जाएगा। पर्यटकों को सुबह 8 से 11 बजे के बीच प्रवेश मिलेगा और शाम 5 बजे तक पार्क क्षेत्र से बाहर निकलना अनिवार्य होगा।
दैनिक भ्रमण के लिए भारतीय पर्यटकों से 300 रुपये और विदेशी पर्यटकों से 1200 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वाहनों के लिए अलग-अलग श्रेणी के अनुसार शुल्क तय किया गया है, जबकि फोटोग्राफी के लिए भी अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। ड्रोन से फोटो और वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
पार्क क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने के लिए ‘केरी इन–केरी आउट’ नियम लागू किया जाएगा। प्रत्येक समूह से 100 रुपये सिक्योरिटी राशि ली जाएगी, जो कचरा वापस लाने पर ही लौटाई जाएगी। इसके लिए बैरियर पर वेस्ट लॉगबुक भी तैयार की जाएगी।
गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक हरीश नेगी ने बताया कि शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नेलांग घाटी को सर्दियों में भी खोलने का निर्णय लिया गया है और एसओपी के तहत सभी गतिविधियां सुरक्षित व नियंत्रित ढंग से संचालित की जाएंगी।








