जोशीमठ।
सीमांत नगर जोशीमठ के प्रसिद्ध नरसिंह मंदिर क्षेत्र में गेट सिस्टम को व्यवस्थित करने के पुलिस प्रशासन के एक फैसले पर स्थानीय महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जोशीमठ से लेकर पेट्रोल पंप तक ट्रैफिक को और अधिक कारगर बनाने के उद्देश्य से गेट सिस्टम में कुछ बदलाव किए जा रहे थे, जिसका गांधीनगर वार्ड की सभासद ललिता देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने नरसिंह मंदिर गेट पर एकत्र होकर जमकर विरोध किया और हंगामा काटा। इस दौरान स्थानीय महिलाओं और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। महिलाओं का आरोप है कि पुलिस प्रशासन गांधीनगर क्षेत्र में स्थानीय और बाहरी वाहनों को खड़ा नहीं होने दे रहा है, जिससे क्षेत्र के दुकानदारों, होटल व्यवसायियों और छोटे व्यापारियों का रोजगार पूरी तरह चौपट हो रहा है। सभासद ललिता देवी ने दोटूक शब्दों में कहा कि गाड़ियों के न रुकने से स्थानीय जनता के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है और प्रशासन को कोई भी नई व्यवस्था लागू करने से पहले स्थानीय लोगों के हितों व उनकी आजीविका का ध्यान रखना चाहिए था।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले में जोशीमठ के थाना प्रभारी डी. एस. रावत ने पुलिस प्रशासन का रुख साफ करते हुए कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी के रोजगार को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को सुचारू रखना है। उन्होंने बताया कि पेट्रोल पंप से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक का पूरा इलाका बेहद संवेदनशील है और यहां लगातार लग रहे जाम के कारण 108 आपातकालीन एम्बुलेंस और अस्पताल के वाहनों को निकलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था। कई बार जाम के चलते गंभीर मरीजों की जान भी खतरे में पड़ जा रही थी। इसी आपात स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा अब इस मार्ग पर केवल चुनिंदा जगहों पर ही छोटी गाड़ियां खड़ी करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि सभी बड़ी बसों को नरसिंह मंदिर से पहले ही पार्क कराया जा रहा है ताकि यातायात सुचारू रह सके। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि मरीजों की जिंदगी बचाना पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का पहला और परम कर्तव्य है, और भविष्य के लिए भी इसी तरह का व्यवस्थित प्लान तैयार किया गया है।
गौरतलब है कि चालू यात्रा सीजन के दौरान जोशीमठ को भीषण जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ही पुलिस प्रशासन ने नरसिंह मंदिर क्षेत्र में इस ‘गेट सिस्टम’ को सुचारू किया था। शुरुआत में इस व्यवस्था से तीर्थयात्रियों को जहां जाम से बड़ी निजात मिली थी, वहीं स्थानीय लोगों को भी आवाजाही में काफी सहूलियत हो रही थी। हालांकि, अब पार्किंग और आजीविका के सवाल पर स्थानीय व्यापारियों और महिलाओं के विरोध के बाद नरसिंह मंदिर गेट पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में प्रशासन की उच्च स्तरीय टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी महिलाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को समझा-बुझाकर शांत कराया और इस संवेदनशील मामले का ऐसा बीच का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया जिससे मरीजों को आपातकालीन सेवा भी समय पर मिले और स्थानीय लोगों के रोजगार पर भी कोई आंच न आ
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