गोपेश्वर। मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत भोजनमाताओं ने सोमवार को जिला शिक्षा भवन गोपेश्वर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला मुख्य शिक्षा अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम छह सूत्रीय ज्ञापन प्रेषित किया गया।
भोजनमाताओं का कहना है कि वे वर्षों से अल्प मानदेय पर कार्य कर रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम वेतन नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र संख्या कम होने के कारण विद्यालय बंद होने पर शिक्षकों का अन्य विद्यालयों में समायोजन कर दिया जाता है, जबकि भोजनमाताओं को सेवा से हटाया जा रहा है, जिससे उनके सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
ज्ञापन में भोजनमाताओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में मान्यता, ₹26 हजार प्रतिमाह न्यूनतम वेतन, विद्यालय बंद होने की स्थिति में अन्य विद्यालयों में समायोजन, भविष्य निधि (पीएफ), ईएसआई, पेंशन एवं ग्रेच्युटी की सुविधा, अतिरिक्त कार्य का अलग से भुगतान तथा विद्यालयों में भोजन बनाने के लिए गैस या जलावन की व्यवस्था विभाग द्वारा सुनिश्चित करने की मांग की।
भोजनमाताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे प्रदेशव्यापी आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होंगी।
इस दौरान राजेंद्र सिंह नेगी, जितेंद्र सिंह, अनीता देवी, ज्योति गौर आदि मौजूद रहे
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