चमोली। औली में भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ में आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के करीब 1200 सैनिकों को रोबोटिक तकनीक के उपयोग और युद्ध के दौरान इसकी संभावित भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।
अभ्यास में प्रदर्शित रोबोट कठिन और दुर्गम इलाकों में चलने में सक्षम है। इसमें कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से दूर से निगरानी और खतरनाक क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा सकती है। जरूरत के अनुसार ऐसे रोबोट को विभिन्न सैन्य उपकरणों के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
सैनिकों को बताया गया कि आधुनिक युद्ध में रोबोट तकनीक किस तरह मानव सैनिकों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है। विशेष रूप से ऐसे इलाकों में, जहां सैनिकों के लिए सीधे प्रवेश करना जोखिम भरा हो, वहां रोबोट को पहले भेजकर निगरानी या अन्य जरूरी कार्य कराए जा सकते हैं।
भारत और अमेरिका के सैनिकों ने इस दौरान रोबोट के संचालन, उसकी क्षमताओं और विभिन्न परिस्थितियों में इसके इस्तेमाल की तकनीक को समझा। सैन्य अभ्यास में आधुनिक तकनीक का यह प्रदर्शन बदलते युद्धक परिदृश्य में मानवरहित प्रणालियों की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।
यह चार पैरों वाला रोबोट है, जिसे दुर्गम, ऊबड़-खाबड़ और पहाड़ी इलाकों में चलने के लिए तैयार किया गया है।
उपकरण: इसमें कैमरे लगे होते हैं, जिनकी मदद से दूर से निगरानी और टोह लेने का काम किया जा सकता है। आवश्यकता के अनुसार इसमें राइफल जैसे सैन्य उपकरण भी लगाए जा सकते हैं। इसका प्रमुख उद्देश्य खतरनाक इलाकों में सैनिकों के प्रवेश से पहले वहां पहुंचकर निगरानी करना और सैनिकों के जोखिम को कम करना है।
सैन्य उपयोग
भारतीय सेना द्वारा ऐसे रोबोटिक म्यूल का इस्तेमाल कठिन और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, सीमा गश्त और घुसपैठ-रोधी अभियानों में सहायता के लिए किया जा रहा है। संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ जैसे आयोजनों में भी इस आधुनिक रोबोटिक तकनीक का प्रदर्शन और परीक्षण किया जाता है।
इन रोबोटों की मदद से ऐसे स्थानों पर निगरानी और जरूरी सैन्य कार्य किए जा सकते हैं, जहां सीधे सैनिकों को भेजना जोखिम भरा हो सकता है।








