देहरादून। उत्तराखण्ड कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों के निस्तारण को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। संघ की प्रान्तीय कार्यकारिणी की बैठक में कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर चर्चा के बाद सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया।
संघ के प्रान्तीय अध्यक्ष राकेश सिंह नेगी ने कहा कि कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल संवर्ग प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन कर्मचारियों की कई जायज मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
संघ की प्रमुख मांगों में कलेक्ट्रेट ढांचे का पुनर्गठन, कलेक्ट्रेट को विशेष कार्यालय/विभाग का दर्जा देने, कनिष्ठ सहायक समेत अन्य पदों के ग्रेड-पे में सुधार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को तहसीलदार का लिंक अधिकारी घोषित करने तथा नायब तहसीलदार पदों पर पदोन्नति के लिए कलेक्ट्रेट संवर्ग को 10 प्रतिशत कोटा देने की मांग शामिल है। इसके अलावा वरिष्ठ एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों के रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने तथा पारस्परिक एवं निजी अनुरोध के आधार पर लंबित स्थानांतरण प्रकरणों का निस्तारण करने की मांग भी की गई है।
12 से 14 अक्टूबर तक काली फीती बांधेंगे कर्मचारी
आंदोलन के प्रथम चरण में 12 से 14 अक्टूबर 2026 तक प्रदेशभर के कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी काली फीती बांधकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 17 अक्टूबर को सभी कलेक्ट्रेट मुख्यालयों में एक दिवसीय धरना एवं कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा जाएगा।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बाद भी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो 31 अक्टूबर को प्रान्तीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
प्रान्तीय महामंत्री नवीन मोहन शर्मा ने कहा कि संगठन टकराव नहीं चाहता, बल्कि कर्मचारियों की जायज मांगों का लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से समाधान चाहता है। उन्होंने शासन एवं प्रशासन से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक और समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की, ताकि कर्मचारियों को आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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