हरिद्वार। गंगनहर की वार्षिक बंदी के चलते धर्मनगरी हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर गंगा जल का प्रवाह बेहद कम हो गया है। स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं को हरकी पैड़ी पर स्नान के लिए पर्याप्त जल नहीं मिल पा रहा है। गंगा स्नान की आस्था लेकर हरिद्वार पहुंच रहे यात्रियों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। वहीं, अस्थि विसर्जन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी दशहरे से दीपावली तक गंगनहर की वार्षिक बंदी की गई है। नहर को रात्रि में बंद किया गया है और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 नवंबर की मध्यरात्रि से इसमें दोबारा जलापूर्ति सुचारू की जाएगी। इस अवधि में हरिद्वार से आगे नहर की सफाई, सिल्ट हटाने, मरम्मत और तटबंधों को दुरुस्त करने सहित विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।
गंगनहर की बंदी का असर केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं है। नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी नहर के पानी पर निर्भर पेयजल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इस दौरान संबंधित क्षेत्रों में आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखना भी विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
हरकी पैड़ी पर स्नान नहीं कर पा रहे श्रद्धालु
इन दिनों हरिद्वार में बंगाली यात्रियों का आवागमन जारी है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोग अस्थि विसर्जन और अन्य धार्मिक कर्मकांडों के लिए भी पहुंच रहे हैं। ऐसे में हरकी पैड़ी पर पर्याप्त गंगा जल उपलब्ध नहीं होने से श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ गई है। गंगा स्नान की इच्छा लेकर आए यात्रियों को जल प्रवाह कम होने के कारण निराशा हो रही है।
हरिद्वार पहुंचे यात्री हर्ष अत्री ने बताया कि वह गंगा स्नान के लिए आए थे, लेकिन यहां पहुंचने पर पता चला कि वार्षिक रखरखाव के चलते गंगनहर बंद है। हरकी पैड़ी पर स्नान के लिए जल उपलब्ध नहीं होने से उन्हें निराशा हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि हरिद्वार आए हैं तो गंगा जल का आचमन और छिड़काव कर ही अपनी आस्था पूरी करेंगे।
रखरखाव और कुंभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है बंदी
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अनुसार, गंगनहर की वार्षिक बंदी के दौरान नहर प्रणाली के उन हिस्सों की मरम्मत की जाती है, जहां सालभर पानी बहने के कारण काम करना संभव नहीं हो पाता। नहर प्रणाली का नेटवर्क करीब सात से साढ़े सात हजार किलोमीटर तक फैला है। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर सिल्ट की सफाई, नहर के बहाव मार्ग में आने वाले अवरोधों को दूर करने और क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत का कार्य किया जाता है।
मुजफ्फरनगर से अलीगढ़ तक के निचले डिवीजनों में भी सिल्ट सफाई सहित अन्य आवश्यक कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा हरिद्वार क्षेत्र में जमा गंदगी को हटाने और नहर के प्रवाह मार्ग को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाता है। वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले की तैयारियों के लिहाज से भी यह अवधि महत्वपूर्ण है। जल प्रवाह बंद होने से गंगनहर के किनारे करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित घाटों के निर्माण कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी।
अधिशासी अभियंता विकास त्यागी के अनुसार, वार्षिक बंदी के दौरान आवश्यक सफाई और मरम्मत कार्य पूरे किए जाते हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दीपावली की मध्यरात्रि से गंगनहर में जलापूर्ति दोबारा शुरू कर दी जाएगी।
पूजा-अर्चना के लिए जल छोड़ने की मांग
हरकी पैड़ी पर गंगा जल की कमी को लेकर स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि हरकी पैड़ी पर स्नान और आचमन के लिए भी पर्याप्त जल नहीं है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के साथ अस्थि विसर्जन के लिए भी पहुंचते हैं। ऐसे में धार्मिक गतिविधियों को देखते हुए विभाग को कम से कम नित्य पूजा-अर्चना के लिए कुछ मात्रा में गंगा जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए।
गंगनहर की वार्षिक बंदी जहां नहर की सफाई, मरम्मत और आगामी कुंभ की तैयारियों के लिए आवश्यक है, वहीं हरकी पैड़ी पर गंगा जल की उपलब्धता का सवाल भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। ऐसे में रखरखाव कार्यों के साथ धार्मिक गतिविधियों के लिए जल की व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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