जनता के चंदे से चुनाव लड़ते थे इन्द्रमणि बडोनी, रौड़धार में जुटे थे 358 रुपये
1977 के विधानसभा चुनाव की तस्वीर बयां करता है पुराना दस्तावेज, पर्चे, बैज और जीप के सहारे चलता था प्रचार अभियान
टिहरी गढ़वाल। आज के दौर में जहां चुनाव प्रचार में बड़े पैमाने पर धन खर्च होने की चर्चा होती है, वहीं उत्तराखंड के जननायक इन्द्रमणि बडोनी के चुनाव लड़ने का पुराना प्रसंग राजनीति के उस दौर की याद दिलाता है, जब जनसहयोग के सहारे चुनावी अभियान चलाए जाते थे। वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे इन्द्रमणि बडोनी के प्रचार के लिए ग्रामीणों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार चंदा दिया था। रौड़धार में जुटाए गए इस चंदे का विवरण पांच जून 1977 को साप्ताहिक पत्रिका ‘युगवाणी’ में प्रकाशित हुआ था।
इन्द्रमणि बडोनी टिहरी गढ़वाल की देवप्रयाग विधानसभा सीट से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए वर्ष 1967 और 1969 में विधायक चुने गए थे। वर्ष 1974 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 1977 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में फिर चुनाव लड़ा।
चुनाव प्रचार के दौरान 23 मई 1977 को बडोनी रौड़धार पहुंचे थे। यहां उनके चुनाव अभियान के लिए ग्रामीणों ने चंदा दिया। उस समय चुनाव प्रचार का मुख्य खर्च अपील के पर्चे छपवाने, चुनाव चिह्न वाले बैज तैयार करवाने और प्रचार के लिए जीप की व्यवस्था करने में होता था। ग्रामीणों के छोटे-बड़े आर्थिक सहयोग से चुनाव अभियान आगे बढ़ता था।
किसी ने 5 तो किसी ने दिए 101 रुपये
‘युगवाणी’ में प्रकाशित विवरण के अनुसार, रौड़धार में मदन सिंह ने 21 रुपये, सुंदर सिंह डोटियाल ने 101 रुपये, मक्कम सिंह माल्डा ने 10 रुपये, सत्य प्रसाद पंचुर ने 51 रुपये, मुरारीलाल भट्ट ने 21 रुपये और पूर्ण सिंह बिष्ट माल्डा ने 51 रुपये का योगदान दिया था।
इसी तरह भगवान सिंह भंडारी ने 21 रुपये, रूपचंद कफलना ने पांच रुपये, श्याम सिंह भंडारी चांगी ने 21 रुपये, डॉ. गजेंद्र दत्त तिवारी पंचुर ने 11 रुपये, फुलानन्द सरपंच कुमराड़ा ने 10 रुपये, गोकल सिंह बिष्ट पंचुर ने पांच रुपये और रुकम सिंह बागड़ी ने 31 रुपये दिए थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, रौड़धार में कुल 358 रुपये का चंदा एकत्र हुआ था।
जनसहयोग था चुनाव अभियान का आधार
बताया जाता है कि बडोनी के चुनाव प्रचार के लिए अन्य गांवों में भी इसी तरह चंदा जुटाया गया था। जनसहयोग से चलाए गए इस अभियान में आम लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण रही। वर्ष 1977 के इस प्रसंग को उस दौर की राजनीति में सादगी और जनता से सीधे जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है।
इन्द्रमणि बडोनी को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख जननायकों में गिना जाता है। उनके चुनाव अभियान से जुड़ा यह पुराना विवरण आज की चुनावी राजनीति और उस समय के तौर-तरीकों के बीच के अंतर को भी सामने रखता है।
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