Home उत्तराखंड
1
0

ब्रह्म कमल से दिव्य हुआ नंदाष्टमी का माहौल
उच्च हिमालय में खिले दुर्लभ पुष्प को नंदा देवी की पूजा में किया गया अर्पित
चमोली। सीमांत जनपद चमोली में नंदाष्टमी के पर्व पर इन दिनों नंदा देवी की भक्ति का माहौल बना हुआ है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खिलने वाले राज्य पुष्प ब्रह्म कमल को नंदाष्टमी के अवसर पर श्रद्धा के साथ नंदा देवी की पूजा-अर्चना में अर्पित किया जा रहा है। कई गांवों में उच्च हिमालय से ब्रह्म कमल लाकर इसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की परंपरा भी रही है।
उत्तराखंड का राज्य पुष्प ब्रह्म कमल करीब 3,000 से 4,500 मीटर की ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में खिलता है। दुर्लभ प्रजाति का यह पुष्प धार्मिक आस्था के साथ-साथ उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष चमोली के कई उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ब्रह्म कमल खिले हैं।
पर्यावरणविद् चंदन नयाल के अनुसार किसी क्षेत्र में ब्रह्म कमल का अच्छी संख्या में खिलना वहां के उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति से जुड़े सकारात्मक संकेतों में से एक माना जा सकता है। हालांकि इसके संरक्षण के लिए इसके प्राकृतिक आवास और पुष्प को नुकसान से बचाना जरूरी है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार ब्रह्म कमल मां नंदा और भगवान शिव को प्रिय माना जाता है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित मंदिरों में इसे अर्पित करने की परंपरा रही है। पुजारी महादेव भट्ट के अनुसार नंदाष्टमी पर ब्रह्म कमल को पूजा में शामिल किया जाता है और कई स्थानों पर इसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाता है। इस तरह नंदाष्टमी के पर्व पर ब्रह्म कमल आस्था और प्रकृति के अनूठे संगम का प्रतीक बन रहा है।