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गोपेश्वर नगर से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नागरिक मंच ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से की मुलाकात

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गोपेश्वर नगर से जुड़ी विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान को लेकर नागरिक मंच के प्रतिनिधियों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से गोपेश्वर नगर की प्रमुख समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया गया।नागरिक मंच ने बताया कि गोपेश्वर नगर क्षेत्र अंतर्गत कोठियालसैन हेलीपैड का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और यहां से हेली सेवाओं का संचालन भी होता रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय होने के बावजूद गोपेश्वर नगर को अब तक उड़ान योजना से नहीं जोड़ा गया है। सरकार द्वारा निर्मित हेलीपैड के उपयोग में न आने के कारण स्पोर्ट्स स्टेडियम और पुलिस मैदान में हेलीकॉप्टर लैंडिंग कराई जाती है, जिससे मैदानों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिला मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय से कई गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। कई मामलों में चिकित्सकों द्वारा हेली एम्बुलेंस की आवश्यकता बताई जाती है, लेकिन समय पर सेवा न मिलने के कारण लोगों को अपनों की जान गंवानी पड़ी है। यदि गोपेश्वर से उड़ान सेवा प्रारंभ होती है तो कम लागत में मरीजों को हायर सेंटर भेजा जा सकेगा और आम जनता को भी इसका लाभ मिलेगा।नागरिक मंच ने सवाल उठाया कि उत्तराखंड के लगभग सभी जिला मुख्यालयों से उड़ान सेवा संचालित है, लेकिन जनपद चमोली के मुख्यालय गोपेश्वर को इससे वंचित रखा गया है, जो समझ से परे है। उन्होंने मांग की कि गोपेश्वर मुख्यालय से उड़ान सेवा शीघ्र शुरू की जाए।इसके साथ ही ज्ञापन में गोपेश्वर में लिसा फैक्ट्री से कोठियालसैन बाईपास निर्माण का मुद्दा भी उठाया गया। बताया गया कि इस बाईपास की स्वीकृति लगभग दस वर्ष पूर्व हो चुकी है, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। बाईपास के निर्माण से गोपेश्वर नगर को जाम की समस्या से राहत मिल सकती है।
नागरिक मंच ने बताया कि गोपेश्वर नगर के सात नालों के निर्माण हेतु सरकार द्वारा धन आवंटित किया गया है, जिसके लिए नगरवासी आभारी हैं। हालांकि लोक निर्माण विभाग द्वारा पठियालधार के समीप बनाए गए एक नाले को अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे पाडुली गांव के खेतों और फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने मांग की कि अधूरे नाले को भी सात नालों की योजना में शामिल कर पूर्ण किया जाए, ताकि भूस्खलन और जलभराव की समस्या से निजात मिल सके।