देवाल। ब्लॉक के ल्वाणी- पिलखडा में आयोजित दो दिवसीय श्री नंदा राजराजेश्वरी संस्कृति संरक्षण मेले का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हो गया है। इस दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ने क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
समापन समारोह का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री बसंती बिष्ट के द्वारा किया गया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि इस तरह के पारंपरिक मेले हमारी सांस्कृतिक पहचान को जिंदा रखने और भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ राज्य मंत्री बलवीर घुनियाल ने किया। सांस्कृतिक संध्या में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक गायक दर्शन फरस्वाण ने जैसे ही मंच संभाला, समारोह दर्शकों की तालियों से गूंज उठा। उनके एक से एक बढ़कर गढ़वाली लोकगीत गीत व जागर हे नंदा हे गौरा कैलाश की यात्रा — हे माता सुनंदा भवानी —, होये होये झुमक्याली—, हे शिव जटाधारी, जय शिव जटाधारी—, ऊंची डांडयु मा रैणी आछरी—-पर दर्शक रात तक जमकर थिरके। गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी संस्कृति की धूम
संस्कृति संरक्षण को समर्पित इस मेले में उत्तराखंड के अलग-अलग अंचलों की झलक देखने को मिली। महिला मंगल ल्वाणी, ताजपुर, मुंदोली, सुया, धुराधारकोट, हरनी, इंटर कालेज ल्वाणी, प्राथमिक स्कूल सहित कई शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं व लोक कलाओं ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।
इस दो दिवसीय मेले का आनंद लेने सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे थे। मेले के सफल आयोजन पर मेला अध्यक्ष महाबीर बिष्ट ने सभी अतिथियों व इस मेला को प्रदेश के प्रमुख मेलों की सूची में शामिल करने पर सरकार का आभार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि पद्मश्री बसंती बिष्ट ने सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया।
समापन समारोह में मेलाध्यक्ष महाबीर बिष्ट, जिपंस उर्मिला बिष्ट, डॉ कृपाल भंडारी, इंद्रसिंह राणा, गंगा सिंह, गोपाल दत्त कुनियाल, राधा देवी बिष्ट, कमल गडिया, लखन रावत, रुपसिंह कुंवर, पुष्कर फस्वार्ण, राजकुमार, सुरेंद्र रावत, पुष्पा नेगी, हुकम सिंह, मनोज कोठियाल, उर्वी जोशी, किशोर घुनियाल, महिपाल सिंह, हीरा गडिया, धन सिंह, हीरा राम आदि मौजूद रहे।
Sign in
Welcome! Log into your account
Forgot your password? Get help
Password recovery
Recover your password
A password will be e-mailed to you.








