चमोली, 11 अगस्त। देश की सेवा में तैनात एक जवान की जिंदगी गंभीर बीमारी के आगे थम गई। CRPF जवान गजेंद्र कुमार (29) ने करीब चार महीने तक गंभीर बीमारी से जूझने के बाद मंगलवार को एम्स में अंतिम सांस ली। जवान के निधन की खबर मिलते ही परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
गजेंद्र कुमार स्वर्गीय गिरधारी लाल के पुत्र थे और मूल रूप से ग्राम जखनियाला, ब्लॉक जखोली, जिला रुद्रप्रयाग के रहने वाले थे। उनका वर्तमान आवास पटियालधार में था। CRPF में तैनात गजेंद्र की ड्यूटी देहरादून में थी। पिछले चार महीनों से वह गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनका उपचार चल रहा था। परिजनों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद वह स्वस्थ होकर फिर अपने परिवार के बीच लौटेंगे, लेकिन मंगलवार को एम्स में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

जवान का पार्थिव शरीर उनके पटियालधार स्थित आवास पर लाया गया। पार्थिव शरीर के घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। जिस घर में गजेंद्र के स्वस्थ होकर लौटने की उम्मीद थी, उसी घर में उनका पार्थिव शरीर पहुंचा तो हर आंख नम हो गई।

इसके बाद गमगीन माहौल में जवान का अंतिम संस्कार चमोली घाट पर किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान CRPF के अधिकारी एवं जवान, परिजन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। मदन लोहानी, गोविंद सजवाण, सूर्या पुरोहित पार्षद और दीपक बिष्ट पार्षद समेत अन्य लोगों ने जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को ढांढस बंधाया।
मां, पत्नी और पांच साल का मासूम बेटा रह गया

गजेंद्र के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पीछे माता, पत्नी और महज पांच वर्ष का छोटा बेटा रह गया है। जिस उम्र में एक बच्चा पिता की उंगली पकड़कर जीवन की राह सीखता है, उसी उम्र में गजेंद्र के मासूम बेटे के सिर से पिता का साया उठ गया।
अंतिम संस्कार के दौरान तिरंगे में लिपटा जवान का पार्थिव शरीर देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। परिवार के लिए यह विश्वास करना भी मुश्किल था कि जिस गजेंद्र के स्वस्थ होकर घर लौटने का इंतजार किया जा रहा था, आज वही गजेंद्र अंतिम यात्रा पर जा रहे हैं।

गजेंद्र ने देश की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। बीमारी से जूझते हुए भी उनके परिवार को उनके वापस लौटने की उम्मीद थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी अंतिम विदाई के दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि गजेंद्र भले ही आज उनके बीच नहीं हैं, लेकिन देश सेवा में उनका योगदान और उनकी स्मृतियां हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।
एक जवान चला गया, लेकिन अपने पीछे एक मां की ममता, पत्नी का जीवनभर का सहारा और पांच साल के मासूम बेटे की पूरी जिंदगी भर की याद छोड़ गया।
Sign in
Welcome! Log into your account
Forgot your password? Get help
Password recovery
Recover your password
A password will be e-mailed to you.








