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व्यय वित्त समिति ने 5 विकास परियोजनाओं को दी मंजूरी, 3 प्रस्ताव समीक्षा के लिए रखे

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326.64 करोड़ की पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय और 382.40 करोड़ की खैरना बैराज पेयजल परियोजना को स्वीकृति, कुंभ मेला-2027 की स्वच्छता व्यवस्था के लिए 25 करोड़ मंजूर
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में विभिन्न विभागों की आठ विकास परियोजनाओं के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। समिति ने पांच प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की, जबकि तीन प्रस्तावों को आवश्यक समीक्षा एवं परीक्षण के लिए आरक्षित रखा। बैठक में पेयजल, सिंचाई, सड़क, पर्यटन, शहरी विकास और आधारभूत सुविधाओं से संबंधित परियोजनाओं पर विचार किया गया।
बैठक में सहसपुर स्थित 326.64 करोड़ रुपये की पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी जलाशय परियोजना और नैनीताल जनपद की 382.40 करोड़ रुपये की खैरना बैराज पेयजल परियोजना को मंजूरी दी गई। इसके अलावा बागेश्वर में 13.15 करोड़ रुपये की लागत से सर्किट हाउस निर्माण, नैनीताल जिले में कैंची धाम बाईपास मोटर मार्ग के डामरीकरण एवं सुधारीकरण के लिए 21.81 करोड़ रुपये और कुंभ मेला-2027 के लिए 25 करोड़ रुपये की स्वच्छता संबंधी परियोजना को भी अनुमोदन प्रदान किया गया।
परियोजनाओं की लागत और गुणवत्ता पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी परियोजना को तैयार करने से पहले उसके तकनीकी, भू-वैज्ञानिक, वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाए। सभी आवश्यक सहमतियां एवं अनुमोदन समय से प्राप्त किए जाएं, ताकि परियोजनाओं की स्वीकृति और क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी न हो।
उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की अनुमानित लागत तय करते समय वित्तीय अनुशासन और भविष्य की आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए। अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर लागत वृद्धि के लिए दोबारा प्रस्ताव प्रस्तुत करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। यदि लागत बढ़ाने की आवश्यकता हो, तो उसके कारणों, संबंधित पक्षों की सहमति और आवश्यक अनुमोदनों का स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
मुख्य सचिव ने परियोजनाओं के भौतिक सत्यापन के लिए सक्षम अधिकारियों एवं अधिकृत एजेंसियों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
स्यूंसी झील और रुद्रप्रयाग मास्टर प्लान की होगी समीक्षा
सिंचाई विभाग की मुख्यमंत्री घोषणा से संबंधित चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के विकासखंड बीरोंखाल में स्यूंसी झील निर्माण परियोजना तथा रुद्रप्रयाग शहर के मास्टर प्लान फेज-1 से संबंधित परियोजना की समीक्षा के निर्देश दिए गए।
रुद्रप्रयाग मास्टर प्लान के तहत ड्रेनेज व्यवस्था पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि घरों से निकलने वाला गंदा पानी किसी भी स्थिति में सीधे नदी में प्रवाहित नहीं होना चाहिए। इसके लिए प्रभावी जल निकासी और अपशिष्ट जल प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कैंची धाम बाईपास और बागेश्वर सर्किट हाउस को मंजूरी
राज्य संपत्ति विभाग एवं लोक निर्माण विभाग से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत बागेश्वर में 13.15 करोड़ रुपये की लागत से सर्किट हाउस निर्माण कार्य को मंजूरी दी गई। वहीं, नैनीताल विधानसभा क्षेत्र के विकासखंड बेतालघाट में दुनिघाट से रातिघाट (पाडली) तक श्री कैंची धाम बाईपास मोटर मार्ग के डामरीकरण एवं सुधारीकरण के लिए 21.81 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। इन कार्यों से क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं और सड़क संपर्क को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कुंभ मेला-2027 की स्वच्छता व्यवस्था होगी मजबूत
शहरी विकास विभाग एवं नगर निगम हरिद्वार के अंतर्गत कुंभ मेला-2027 के लिए एकीकृत स्वच्छता संचालन हेतु मानव संसाधन व्यवस्था से संबंधित 25 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को अनुमोदन प्रदान किया गया।
मुख्य सचिव ने कुंभ मेला अधिकारी और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों तथा स्वच्छता कार्यों में तैनात कार्मिकों के सत्यापन की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। इसके लिए बायोमेट्रिक सत्यापन सहित आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि वास्तविक उपस्थिति और तैनाती का सटीक आकलन हो सके।
उन्होंने कहा कि सत्यापन एवं आवश्यक जांच के बाद ही संबंधित एजेंसियों और कार्मिकों को भुगतान किया जाए। इससे कुंभ मेले के दौरान स्वच्छता व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
केदारनाथ धाम की परियोजना का होगा लागत सत्यापन
पर्यटन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग से संबंधित केदारनाथ धाम में समग्र आधारभूत संरचना, सबस्टेशन पैनल और अन्य निर्माण कार्यों के प्रस्ताव को आवश्यक समीक्षा के लिए आरक्षित रखा गया। मुख्य सचिव ने दोनों विभागों को परियोजना की अतिरिक्त लागत का विस्तृत सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लागत वृद्धि के कारणों और कार्यों की वास्तविक आवश्यकता का परीक्षण करने के बाद संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए, ताकि नियमानुसार निर्णय लिया जा सके।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को विकास परियोजनाओं के नियोजन और क्रियान्वयन में वित्तीय अनुशासन, तकनीकी गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी औपचारिकताएं समय से पूरी कर स्वीकृत परियोजनाओं का लाभ निर्धारित अवधि में आम जनता तक पहुंचाया जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव लोक निर्माण विभाग पंकज पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, नियोजन विभाग के श्रीधर बाबू अद्दांकी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।