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जोशीमठ नगर बचाने के लिए संघर्ष समिति ने दिया ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी

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जोशीमठ: जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने जोशीमठ नगर में लगातार बढ़ते जा रहे भूस्खलन को अनदेखा कर लगातार विस्फोटकों के जरिये बाईपास के निर्माण के चलते जोशीमठ नगर के अस्तित्व पर ही संकट के सन्दर्भ में एवं इसपर शीघ्र कार्यवाही के अभाव में जनांदोलन की पूर्व सूचना के बावत उप जिला अधिकारी कुमकुम जोशी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।

ज्ञापन में कहा कि जोशीमठ उत्तराखण्ड में भारत चीन सीमा पर बसा अंतिम नगर है । इस नगर का ऐतिहासिक महत्व है । कत्यूरी राजवंश की राजधानी होने से इसका उत्तराखण्ड के इतिहास में खास महत्व है । शंकराचार्य के यहां आने ज्ञान पाने व प्रथम मठ स्थापना के बाद इस नगर का धार्मिक सांस्कृतिक महत्व पिछले 13 सौ सालों में लगातार बढ़ा ही है । पिछले 30 चालीस सालों में इस नगर का पर्यटन महत्व भारत की सबसे लंबे रोपवे बनने से व औली के स्कीइंग केंद्र बनने से बढ़ता गया है । सेना, आईटीबीपी गढ़वाल स्काउट्स के यहां मुख्यालय होने से इस नगर का रणनीतिक महत्व है । पिछले एक दशक में इसके महत्व बढ़ने से इस नगर की आबादी में भी बहुत वृद्धि हुई है ।

संघर्ष समिति के अतुल सती का कहना है कि यह क्षेत्र पूर्व से ही भूस्खलन का क्षेत्र रहा है । भू गर्भ शास्त्रियों के अनुसार यह मोरेन पर बसा है । उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा गठित 1976 की मिश्रा कमेटी ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट देते हुए इस नगर को बचाए रखने के लिए यहां भारी निर्माण पर रोक लगाने की सिफारिश की थी । उस पर अमल न होने से आज क्षेत्र की भार ग्रहण क्षमता से बहुत अधिक आबादी व निर्माण का यहां संकेन्द्रण हुआ है ।

वही कमल रतूड़ी ने बताया कि , नवम्बर 2021 के बाद से नगर के बहुत से घर मकानों पर दरारें आनी शुरू हुई । बहुत सी सड़कें धंसाव के चलते बैठ गईं, व टेढ़ी हो गईं । बहुत से क्षेत्र में भू स्खलन बढ़ गया । जिससे लोगों में चिंता बढ़ गयी । जिसके बाद स्वतंत्र वेैज्ञानिकों की टीम ने और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की टीम ने क्षेत्र का सर्वेक्षण कर अपनी रिपोर्ट दी है । जिनमें नगर की स्थिति अत्यंत संवेदनशील बताई गयी है । यहां किसी भी तरह के भारी निर्माण से नगर का अस्तित्व ही समाप्त हो सकता है । सभी रिपोर्ट सरकार के पास हैं सार्वजनिक हैं । ऐसे में जब कि नगर के अस्तित्व पर ही सवाल है तब नगर के ठीक नीचे नगर की जड़ में चट्टानों को तोड़ कर बाईपास बनाने से नगर को और खतरे में डालना है । जबकि नगर में वैकल्पिक मार्ग की पर्याप्त उपलब्धता है । सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर केन्द्र सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (डॉ रवि चोपड़ा कमेटी) ने भी इस संदर्भ में अपनी आपत्ति दर्ज करते हुए नगर में पहले से उपलब्ध मार्गों के चौड़ीकरण का विकल्प सुझाया था । सम्पूर्ण जोशीमठ नगर की जनता भूस्खलन के कारण घरों में आई दरारों से पहले ही चिंतित है । उसपर बाईपास निर्माण में हो रहे भारी विस्फोटों से नगर के अस्तित्व पर ही संकट पैदा हो गया है। जिसके निशान भी दिखने लगे हैं ।इससे जोशीमठ की जनता में तीव्र आक्रोश है । एनटीपीसी की सुरंग में पिछले 12 साल से लगातार हो रहे जल रिसाव ने भी इस संकट को बढ़ाने में भूमिका निभाई है । पूर्व में एनटीपीसी से हुए हमारे समझौते में सन 2010 में एनटीपीसी ने लोगोंतक घर मकानों का बीमा करने का लिखित भरोसा दिया था । यदि वह पूरा कर लिया गया होता तो आज लोगों को इस तरह सरकार के भरोसे न रहना पड़ता ।
उपरोक्त के मद्देनजर हमारी मांग है कि हमारी मांग है कि

1- हेलंग मारवाड़ी बाईपास के कार्य को तुरन्त रोका जाय । वहां किये जा रहे अवैध विस्फोटों के लिये कार्यदायी संस्था पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाय ।

2 – एनटीपीसी को पूर्व में किये समझौते के पालन के लिए सरकार निर्देशित करे, जिसके तहत जोशीमठ के समस्त घर मकानों का बीमा किया जाना था । साथ ही एनटीपीसी की सुरंग को इस भूस्खलन के एक कारक के तौर जिम्मेदार मानते हुए जोशीमठ के लोगों को हुए नुकसान की भरपाई हेतु निर्देशित किया जाए ।
3- भूस्खलन के कारण बेघर हो रहे लोगों के तुरन्त विस्थापन पुनर्वास की व्यवस्था की जाय । जिनके घरों की क्षति हुई है उनकी क्षति पूर्ति वर्तमान बाजार दर पर की जाए ।
4- उत्तराखण्ड सरकार की वर्तमान विस्थापन एवं पुनर्वास नीति में संशोधन किया जाए ।
वर्तमान में विस्थापन नीति के बजाय लोगो को केदारनाथ आपदा के समय किये गये क्षतिपूर्ती प्रावधानों के आधार पर मुआवजा दिया जाए।
5- सम्पूर्ण जोशीमठ के घर मकानों के यथाशीघ्र सर्वेक्षण किया जाय ।

उपरोक्त पर शीघ्र कार्यवाही न होने पर जनता वृहद आंदोलन को बाध्य होगी । प्रकाश नेगी, सूरज कपरवान, अजय अनिल आदि मौजूद रहे