उत्तराखण्ड में वनाग्नि घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वन विभाग की ओर से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। जिसके तहत मंगलवार को वन सरंक्षक व नोडल फायर डा. विनय भार्गव ने चमोली में वनाग्नि प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जनपद के विभिन्न वन प्रभागों के अधिकारियों की बैठक लेते हुए वनाग्नि की रोकथाम के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा की। साथ ही उन्होंने जनपद में बनाए गए क्रू स्टेशनों और वनाग्नि प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दिवंगत फायर वॉचर श्री राजेन्द्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
चमोली के धनपुर स्थित वन विश्राम भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में वन संरक्षक एवं नोडल फायर डा. विनय भार्गव ने कहा कि वनाग्नि नियंत्रण में लगे समस्त फील्ड कार्मिकों की सुरक्षा विभाग की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कठिन एवं संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों हेतु आवश्यक सुरक्षा उपकरण, संचार साधन एवं समुचित समन्वय व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही, वनाग्नि नियंत्रण कार्यों में संलग्न फायर वॉचर्स एवं फील्ड स्टाफ के मनोबल एवं सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की बात भी कही।
बैठक में फायर सीजन के दौरान विभिन्न वन प्रभागों में वनाग्नि की स्थिति, विभागीय तैयारियों, उपलब्ध संसाधनों, नियंत्रण व्यवस्थाओं एवं फायर रिस्पॉन्स सिस्टम की प्रभावशीलता की समीक्षा की गई। बैठक में बद्रीनाथ वन प्रभाग, केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग एवं अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग में विगत वर्षों में घटित हुई वनाग्नि की घटनाओं की समीक्षा की गई। जिस पर बीते 3 वर्षों में हुई वनाग्नि घटनाओं का वर्षवार विवरण, फायर प्लान अंतर्गत प्रस्तावित एवं प्राप्त बजट की स्थिति, विगत 15 दिनों में प्राप्त वनाग्नि घटनाओं का विश्लेषण तथा विगत 05 वर्षों में 15 मई से 31 मई की अवधि के मध्य घटित वनाग्नि घटनाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया।
इस दौरान वर्ष 2026 में प्राप्त कुल फायर अलर्ट्स, वास्तविक एवं फॉल्स अलर्ट्स की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही वर्किंग प्लान, वर्किंग स्कीम एवं मैनेजमेंट प्लान में वनाग्नि न्यूनीकरण हेतु किए गए प्राविधानों की समीक्षा भी की गई। वर्ष 2026 में वनाग्नि से संबंधित पंजीकृत वन अपराध प्रकरणों की समीक्षा करते हुए यह निर्देशित किया गया कि वनाग्नि नियंत्रण एवं रोकथाम संबंधी गतिविधियों में विभागीय उपस्थिति फील्ड स्तर पर प्रभावी रूप से परिलक्षित होनी चाहिए। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सतत निगरानी एवं त्वरित रिस्पॉन्स प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, फायर अलर्ट प्राप्त होने पर तत्काल प्रतिक्रिया एवं समयबद्ध नियंत्रण कार्यवाही सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक पश्चात वन संरक्षक एवं नोडल फायर डा. विनय भार्गव ने चमोली के विभिन्न फायर क्रू स्टेशनों एवं वनाग्नि प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उपलब्ध संसाधनों, संचार व्यवस्था, अग्निशमन उपकरणों, अभिलेखों एवं फायर रिस्पॉन्स प्रणाली का परीक्षण किया गया। इस अवसर पर फायर वॉचर्स एवं फील्ड स्टाफ से संवाद स्थापित कर वनाग्नि नियंत्रण कार्यों की वर्तमान स्थिति, फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों एवं आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की गई। साथ ही चमोली में 20 मई को हुई वनाग्नि की घटना के घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस मौके पर दिवंगत फायर वॉचर श्री राजेन्द्र सिंह द्वारा वनाग्नि नियंत्रण कार्यों में प्रदर्शित कर्तव्यनिष्ठा, साहस एवं समर्पण को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी प्रियंका सुंडली, उप प्रभागीय वनाधिकारी विकास दरमोडा, उप प्रभागीय वनाधिकारी जुगल किशोर, और वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर आदि मौजूद थे।








