लोक संगीत का सम्मान!– हेमा नेगी करासी को मिलेगा 2024 का प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’, पहाड़ के लोक संगीत को दिलाई नई पहचान..
ग्राउंड जीरो से संजय चौहान।
संगीत नाटक अकादमी ने वर्ष 2024 और 2025 के लिए प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप (अकादमी रत्न) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार की घोषणा कर दी है। साथ ही वर्ष 2024 और 2025 के लिए उस्ताद बिस्मिल्लाह खा युवा पुरस्कार के विजेताओं का भी चयन किया गया है। 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ के लिए 106 युवा कलाकारों का भी चयन किया है। उत्तराखंड की लोकगायिका हेमा नेगी करासी का लोक संगीत के लिए वर्ष 2024 का संगीत नाटक अकादमी ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए चयन किया गया। पहाड़ के लोक संगीत को ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हेमा नेगी करासी को मिलेगा पुरस्कार। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार में नगद धनराशि राशि के अलावा एक ताम्रपत्र और एक अंगवस्त्रम प्रदान किया जाता है। ये सम्मान केवल उत्कृष्टता और उपलब्धि के उच्चतम मानक के प्रतीक ही नहीं है अपितु निरंतर व्यक्तिगत कार्य और योगदान को भी मान्यता देते हैं।
संघर्षों से फूटे स्वर, पहाड़ के लोक संगीत और जागर शैली विधा को संजो कर नयी पीढ़ी तक पहुंचाया..
हेमा करासी नेगी का जीवन बेहद संघर्षों से भरा हुआ है। आभावों में रहकर हेमा नें जीवन के मायनों का पाठ भली भांति पढ लिया था। हालतों नें हेमा को मानसिक रूप से बेहद मजबूत कर लिया था। पहाड़ की इस बेटी नें विपरीत और विषम परिस्थितियों में भी कभी हार नहीं मानी और अपना मुकाम खुद हाशिल किया। 2003 में गाँव के इंटर काॅलेज कांडई में वार्षिकोत्सव से शुरू हुआ गायन का सिलसिला विगत 22 सालों से अनवरत जारी है। हेमा अभी तक 25 से अधिक एलबम निकाल चुकी है।
जादुई और मखमली आवाज में खनकती है पहाड़ के लोक की खनक।
हेमा के लोकगीतों और लोकजागरों में आपको लोक का अहसास कराती खनक जरूर सुनाई देगी। हेमा की जागर शैली नें लोकगीतों को नया मुकाम दिलाया है। खासतौर पर परम्परागत परिधान में उन्हें स्टेज पर देखना लोक को नई ऊचांई प्रदान करती है। हेमा नें लोकसंस्कृति को नयी पहचान दिलाने की हरसंभव कोशिश की है। हेमा ने पहाड़ के लोक संगीत को बुलंदियों तक पहुंचाया है। पहाड़ के लोक के जागरों, मांगल गीतों की कुटयारी का संरक्षण करके नई पीड़ी तक पहुंचाने का कार्य किया है। हेमा नेगी करासी के गीतों गिर गेंदुवा, मेरी बामणि, मांगल गीत, आछरी जागर, कार्तिक स्वामी, मखमली घाघरी, संजू का बाबा, गुड्डू का बाबा पर हर कोई झूमने और थिरकने को मजबूर हो जाता है।
केदार घाटी से लेकर सात समंदर पार भी हेमा नेगी करासी के गीतों के हर कोई है मुरीद, लाखों हैं प्रशंसक..
हेमा नेगी के गीतों और जागरों की धूम केदार घाटी से लेकर उत्तराखंड और देश के कोने कोने से लेकर सात संमदर पार तक है। देहरादून, हल्द्वानी, दिल्ली, गाजियाबाद, लखनऊ, चंडीगढ़, अमृतसर, मुम्बई से लेकर इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दुबई, जापान में हेमा नेगी करासी अपनी शानदार प्रस्तुतियों से अपने प्रशंसकों को अपने गीतों और जागरो पर झूमने को मजबूर कर चुकी हैं।
पिताजी से विरासत में मिली थी लोक की समझ, पति और परिवार ने हर कदम पर दिया साथ..
रूद्रप्रयाग जनपद के दशज्यूला- कांडई पट्टी के टुखिंडा गाँव निवासी चंद्र सिंह नेगी जी की छः संतानों में हेमा चौथे नंबर की थी। हेमा जब छोटी थी तो अपने पिताजी से अक्सर जागर, लोकगीतों, झुमेलो, चौंफुला, दांकुडी को सुना करती थी। बकौल हेमा मैं इतनी छोटी थी की उस समय मुझे लोकगीतों की भले ही कोई समझ नहीं थी लेकिन आज मुझे लगता है कि लोक को समझने की असली समझ मेरे पिताजी से ही मुझे मिली हैं। मैं जब महज 4 बरस की थी तो — दे देवा बाबाजी…. गीत गाया था मुझे आज भी याद है कि मेरे पिताजी नें मुझे बहुत शाबासी दी थी। धीरे धीरे मैं अक्सर गाने लगती थी। जबकि नरेंद्र सिंह नेगी जी, बंसती बिष्ट दीदी, प्रीतम भर्तवाण जी से बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं आज जहां हूं मेरे पति, परिवार का हर कदम पर साथ मिला, मेरे शुभचिंतकों ने भी मेरा सहयोग किया और मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार सहित मिल चुके हैं दर्जनों पुरस्कार..
लोकगायिका हेमा नेगी करासी को लोक संगीत के लिए विभिन्न मंचों पर दर्जनों सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार, यूथ आइकॉन, उत्तराखंड उदय पुरस्कार, कल्याणी सम्मान, केदार घाटी सम्मान, मां नंदा शक्ति सम्मान, सहित दर्जनों सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। ये सम्मान हेमा नेगी करासी के गायन और पहाड़ की लोक संगीत और जागर विधा का भी सम्मान है।
पहाड़ की कंदराओं, खेतों और पगडंडियों से शुरू हुऐ स्वरों को आज देश के सबसे बड़े मंच पर जगह मिल गई — हेमा नेगी करासी।
हेमा नेगी करासी नें संगीत नाटक अकादमी द्वारा घोषित वर्ष 2024 के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए चयनित होने पर खुशी व्यक्त करते हुए बेहद भावुक होते हुए कहा किे यह सम्मान सिर्फ हेमा नेगी करासी का नहीं है। यह सम्मान है उस हर एक माँ का जिसने मुझे गोद में लेकर लोकगीत सुनाए, उस हर एक बुजुर्ग का जिन्होंने मुझे थपकी देकर आगे बढ़ाया, और मेरे उन करोड़ों प्रशंसकों का जिनकी दुआओं ने मुझे हर मुश्किल से पार निकाला। लोक संगीत को जीना इतना आसान नहीं होता है कई बार लोग पीछे खींचते हैं, रास्ते कठिन होते हैं लेकिन जब शुभचिंतकों, प्रियजनों व भाई-बहनों का साथ हो, तो माँ नंदा खुद रास्ता बनाती हैं। आज जब राष्ट्रीय स्तर पर हमारे उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की गूंज हुई है, तो मन अत्यंत हर्षित है और गर्व महसूस हो रहा है कि लोक संगीत ही हमारी मूल धरोहर है। हेमा नेगी करासी कहती है कि जब ‘संगीत नाटक अकादमी’ की लिस्ट में अपना नाम “उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार” राष्ट्रीय सम्मान के लिए देखा, तो कलेजा भर आया। आँखों के सामने वो पूरा सफर घूम गया, जब आँखों में सिर्फ एक सपना और दिल में अपनी उत्तराखंडी संस्कृति के लिए कुछ करने की ज़िद थी। मेरा यह जीवन और मेरा संगीत हमारी पावन माटी और आपके इस निश्छल प्यार के नाम है।
वास्तव मे देखा जाय तो हेमा नेगी करासी नें बेहद संघर्षों के उपरांत अपना मुकाम तय किया है। हेमा उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है जो जीवन मे थोड़ी सी कठिनाइयों पर हार मान लेते हैं। हेमा नेगी करासी ने लोक संगीत के जरिये लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का अनुकरणीय प्रयास किया है। हेमा नेगी करासी का चयन वर्ष 2024 का संगीत नाटक अकादमी ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार के लिए होने पर हमारी ओर से बहुत बहुत बधाई। बाबा केदार की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।








