चमोली। जनपद चमोली में प्राकृतिक आपदाओं का इतिहास पुराना रहा है। हर वर्ष प्रकृति अपने रौद्र रूप में सामने आकर जनजीवन और आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाती रही है। एक बार फिर नीति घाटी में कुदरत का कहर देखने को मिला है।
10 अगस्त 2026 को नीति घाटी क्षेत्र में तमक नाले पर बना पुल भारी बारिश, मलबे और पानी के तेज बहाव की चपेट में आकर बह गया। घटना के समय क्षेत्र में मौजूद लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, जबकि कुछ वाहन भी मलबे और तेज बहाव की चपेट में आने से बह गए। घटना का मंजर इतना भयावह था कि आसपास के लोगों में दहशत फैल गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में सीमा सड़क संगठन (BRO) का एक चालक लापता बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। वहीं जिला प्रशासन को सूचना मिलने के बाद जोशीमठ तहसील प्रशासन के साथ NDRF और SDRF की टीमों को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

भारी बारिश और संवेदनशील रास्तों के बीच राहत एवं बचाव दल ने जोशीमठ से करीब 37 किलोमीटर की दूरी तय कर तमक क्षेत्र पहुंचकर सर्च और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। हालांकि लगातार बारिश और अंधेरा बढ़ने के कारण रात में अभियान रोकना पड़ा। मंगलवार सुबह से NDRF और SDRF की टीमें एक बार फिर लापता BRO चालक की तलाश में जुटी हुई हैं।
तहसील प्रशासन की ओर से क्षेत्र में हुए नुकसान का आकलन और निरीक्षण भी किया जा रहा है। जिलाधिकारी चमोली विवेक प्रकाश ने बताया कि लापता चालक की खोजबीन जारी है और आसपास के लोगों को हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। ऊपरी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए नदी और नालों के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की अपील की गई है।

एक ही स्थान पर दूसरी बार पुल बहने से बढ़ी चिंता
तमक गांव के पास बहने वाला यह नाला पिछले कुछ वर्षों से लगातार चिंता का कारण बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां पहले भी इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। 10 अक्टूबर 2025 को भी भारी मलबे और पानी के तेज बहाव के कारण इसी स्थान पर बना पुल बह गया था। उस दौरान मलबे के कारण अलकनंदा नदी में झील जैसी स्थिति बनने की आशंका भी पैदा हो गई थी।
अब 10 अगस्त 2026 को एक बार फिर उसी तरह की घटना की पुनरावृत्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। BRO की ओर से बनाया गया वैकल्पिक पुल भी तेज पानी और मलबे के बहाव में टिक नहीं पाया और देखते ही देखते बह गया।
स्थानीय निवासी लक्ष्मण बुटोला का कहना है कि ऊपरी क्षेत्रों में हो रही किसी बड़ी प्राकृतिक हलचल, भू-स्खलन या लगातार बढ़ रहे मलबे के स्रोतों की वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता है। उनका मानना है कि सरकार और संबंधित विभागों को इस क्षेत्र का गंभीरता से भू-वैज्ञानिक परीक्षण और विस्तृत अध्ययन कराना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से होने वाले बड़े नुकसान को रोका जा सके।
फिलहाल तमक नाले पर पुल बहने के बाद नीति घाटी का संपर्क प्रभावित हो गया है और प्रशासन राहत, बचाव, लापता चालक की तलाश तथा नुकसान के आकलन में जुटा हुआ है।








