भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने से पूर्व मान्य पौराणिक एवं धार्मिक परंपरा के अनुसार शनिवार को तिमुण्डा मेला बड़े ही उत्साह के साथ संपन्न हो गया।
देवपुजाई समिति के तत्वाधान मे आयोजित होने वाले तिमुण्डा मेले इस बार तिमुण्डा बीर के नए पश्वा को अवतरित होना था, जिसकी प्रक्रिया भी मेले के तय दिवस पर ही संपन्न की जानी थी। इसलिए सभी देवी देवताओं की मौजूदगी मे नए पश्वा के अवतरित होने की प्रक्रिया के तहत बैजवाड़ी परिवार के दोनों भाइयों को प्रक्रिया मे शामिल किया गया।
नवदुर्गा, भुवनेश्वरी, चंडीका एवं दाणी देवियों के पश्वा अवतरित हुए और इसके बाद छोटे भाई कन्हैया बैजवाड़ी पर तिमुण्डा बीर का पश्वा अवतरित हुआ।
नए अवतरित हुए तिमुण्डा बीर पश्वा ने मठागण मे दुर्गा जी के आलम के चारों ओर घूमते हुए बकरे का कच्चा मांस, कच्चे चांवल, गुड़ व पानी का सेवन किया। इस पूरी प्रक्रिया को नजदीक से देखने के लिए हजारों की संख्या मे लोग पहुंचे थे।








