नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क डिवीजन, जोशीमठ में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून की एक विशेषज्ञ टीम ने मानव-वन्यजीव संघर्ष, भालू आवास की समझ, स्थानीय लोगों की चिंताएँ, संघर्ष के प्रकार, वन विभाग के हस्तक्षेप, पीड़ितों के दृष्टिकोण, स्थानीय नेताओं/जनप्रतिनिधियों की राय और पारिस्थितिकीय अध्ययन जैसे पहलुओं पर विस्तृत क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया।
टीम ने भालू संघर्ष से प्रभावित रविग्राम, गांधीनगर, सुनीत आदि क्षेत्रों का निरीक्षण किया, जहाँ पिछले कुछ समय में भालू द्वारा मवेशियों/लोगों पर हमले और फसल क्षति की घटनाएँ दर्ज हुई हैं। क्षेत्र भ्रमण के दौरान डीएफओ ,एनडीएनपी यश ढोबले (IFS) ने WII टीम के साथ प्रभाग में मानव वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन विषयों पर विस्तृत चर्चा की, जबकि रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) आशीष जीरवाण ने फील्ड विजिट का मार्गदर्शन करते हुए अनुभव साझा किए और स्थानीय स्तर पर अपनाई गई रोकथाम व राहत उपायों की जानकारी दी।
वन विभाग द्वारा अब तक की गई प्रमुख कार्रवाइयों में—प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाना, जागरूकता अभियान चलाना, पीड़ितों/परिवारों के साथ समन्वय, और आगे की निवारणीय योजना बनाना—शामिल है। WII टीम ने पारिस्थितिकीय डेटा संग्रह, आवास उपयोग, संघर्ष हॉटस्पॉट मानचित्रण और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव आंकड़ों को दस्तावेज़ीकृत करने पर भी बल दिया, ताकि दीर्घकालिक समाधान और नीतिगत हस्तक्षेप प्रभावी ढंग से तैयार किए जा सकें।
वन विभाग और WII टीम के सहयोग से आगामी चरण में स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधि और विशेषज्ञों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि शोध निष्कर्षों के आधार पर ठोस कार्ययोजना (गश्त, चेतावनी प्रणाली, फसल-सुरक्षा उपाय, आपातकालीन प्रतिक्रिया दल) लागू की जा सके।WII टीम का नेतृत्व सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर,HWCM अनन्या सराथे के द्वारा किया गया ।
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