Home उत्तराखंड
0
0

रुद्रनाथ की डोली वापसी को लेकर विवाद गहराया, 17 अक्टूबर को बंद होंगे कपाट
ग्वाड गांव के हक-हकूकधारी पारंपरिक मार्ग से डोली वापसी की कर रहे मांग, डुमक गांव से होकर ले जाने की बात पर असमंजस
चमोली। पंचकेदारों में शामिल भगवान रुद्रनाथ के कपाट 17 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की डोली को शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर पहुंचाया जाएगा। हालांकि, इस बार डोली की वापसी के मार्ग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हक-हकूकधारी गांवों के लोगों और मुख्य पुजारी के अलग-अलग पक्ष सामने आने से डोली वापसी की व्यवस्था को लेकर असमंजस बना हुआ है।
भगवान रुद्रनाथ मंदिर की धार्मिक परंपराओं में गोपेश्वर और आसपास के कई गांवों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मंदिर के मुख्य पुजारी गोपेश्वर गांव के भट्ट और तिवारी परिवारों से हैं, जबकि मंदिर से जुड़े 64 गांवों के लोग विभिन्न परंपरागत अधिकारों और व्यवस्थाओं से जुड़े हुए हैं। लंबे समय से मंदिर से जुड़े ग्वाड़ गांव के लोगों ने डोली यात्रा और इससे संबंधित परंपराओं को लेकर आपत्तियां उठाई हैं। इस मामले में मुख्य पुजारी की ओर से भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी गई है।
डुमक गांव से होकर डोली ले जाने की चर्चा में
मुख्य पुजारी हरीश भट्ट ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि डुमक गांव में कुछ माह बाद देवरा यात्रा का आयोजन होना है। इस यात्रा के लिए अनुमति से संबंधित विषय को लेकर ग्रामीणों ने भगवान रुद्रनाथ की डोली को अपने क्षेत्र से होकर ले जाने का निवेदन किया है।
मुख्य पुजारी का कहना है कि डुमक गांव के वजीर देवता का रुद्रनाथ मंदिर से धार्मिक जुड़ाव है और उनका महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में वजीर देवता की ओर से मिले निमंत्रण को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर इस वर्ष भगवान रुद्रनाथ की डोली को वजीर देवता के क्षेत्र से होकर वापस लाने की बात कही गई है।
पारंपरिक मार्ग से वापसी की मांग
दूसरी ओर, डोली यात्रा से जुड़े हक-हकूकधारी ग्वाड़ गांव के लोगों का कहना है कि जिस पारंपरिक मार्ग से भगवान रुद्रनाथ की डोली मंदिर तक पहुंचती है, उसी मार्ग से डोली को वापस शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर लाया जाना चाहिए। ग्रामीणों का जोर धार्मिक परंपराओं और परंपरागत अधिकारों के निर्वहन पर है।
इस विवाद के समाधान के लिए ग्वाड़, गोपेश्वर और डुमक गांव के लोग जिला प्रशासन तक भी पहुंचे, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आने के साथ ही डोली वापसी की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्रशासन से समाधान निकालने की मांग
क्षेत्र के वरिष्ठ लोगों ने जिला प्रशासन से मामले में गंभीरता से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और डोली यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति भी सामान्य बनी रहनी चाहिए। सभी पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर समय रहते ऐसा समाधान निकाला जाना जरूरी है, जिससे भगवान रुद्रनाथ की डोली वापसी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।