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सकण्ड गांव के लिए प्रस्तावित सड़क पर बड़ा खेल, गाँव दिखाया खाली, ग्रामीण पहुँचे डीएम दरबार

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गोपेश्वर। कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बौला-सिंद्रवाणी से सकण्ड तक प्रस्तावित मोटर मार्ग निर्माण को लेकर वन विभाग और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बीच पत्राचार सामने आया है। प्रस्तावित सड़क के लिए 4.90 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित की जानी है। हालांकि, इस परियोजना से बड़ी संख्या में पेड़ों के प्रभावित होने के कारण वन विभाग ने पर्यावरणीय दृष्टि से आपत्ति जताई है।


“प्रभागीय वनाधिकारी केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग, गोपेश्वर की ओर से 21 जून 2023 को अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग गौचर को भेजे पत्र में बताया गया है कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी।
बैठक में सामने आया कि प्रस्तावित सड़क निर्माण से 608 पेड़ एवं पौधे प्रभावित होंगे। वहीं, यह सड़क सकण्ड गांव को जोड़ने के लिए प्रस्तावित है, जिसकी आबादी महज 68 है और कुल 20 परिवार बताए गए हैं। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया था कि इनमें से 18 परिवार गांव छोड़ चुके हैं और वर्तमान में केवल दो परिवार ही वहां रह रहे हैं।”
मंत्रालय की बैठक में इतनी कम आबादी को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को देखते हुए सड़क निर्माण को उचित नहीं माना गया। इसके बाद वन विभाग को स्थल निरीक्षण कर प्रस्ताव का पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए गए।
मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो गांव को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 7 मीटर चौड़ी सड़क के बजाय 3 मीटर चौड़ी वन सड़क बनाई जाए। जरूरत पड़ने पर मोड़ों पर सड़क की चौड़ाई बढ़ाने की अनुमति दी जा सकती है।
वन विभाग के अनुसार, मंत्रालय के निर्देशों से लोक निर्माण विभाग को अवगत कराते हुए संशोधित वन भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया था। हालांकि, लोक निर्माण विभाग ने प्रस्ताव को उच्चाधिकारियों के विचारार्थ भेजने का अनुरोध किया। इसके बाद वन विभाग ने मामले को निदेशक/मुख्य वन संरक्षक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व, गोपेश्वर को भी भेजा।
इस पत्राचार से स्पष्ट है कि सकण्ड सड़क परियोजना में सड़क निर्माण की जरूरत और इससे होने वाले वन नुकसान के बीच संतुलन को लेकर मामला लंबे समय से विचाराधीन रहा है।
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