Home उत्तराखंड 21 दिन के जैव विविधता अध्ययन में बड़ी सफलता, नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क...

21 दिन के जैव विविधता अध्ययन में बड़ी सफलता, नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क में हिम तेंदुए समेत कई दुर्लभ वन्यजीवों के मिले साक्ष्य

1
0

यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क में 21 दिनों तक चले चतुर्थ नंदादेवी जैव विविधता अनुश्रवण अभियान का सफल समापन हो गया है। अभियान के दौरान वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम ने आधुनिक तकनीकों की मदद से उच्च हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता का अध्ययन किया, जिसमें हिम तेंदुए सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी के अहम साक्ष्य मिले हैं।

सात जून से 28 जून तक चले इस अभियान में भारतीय वन्यजीव संस्थान, जीबी पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान, एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय, उत्तराखंड वन विभाग, आईटीबीपी और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने लाता गांव से सरसोपाताल बेस कैंप तक दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया। कैमरा ट्रैप, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बुग्यालों, हिमनदों, वनस्पतियों और वन्यजीवों का विस्तृत अध्ययन किया गया।

अध्ययन के दौरान हिमालयी थार, भरल, कस्तूरी मृग, हिमालयी भालू, साइबेरियन वीजल और पाईका प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दिए। वहीं हिम तेंदुए, हिमालयी रेड फॉक्स, सिरो और हिमालयी मार्टिन की मौजूदगी के अप्रत्यक्ष साक्ष्य भी दर्ज किए गए। वन्यजीवों की निगरानी के लिए 50 से अधिक कैमरा ट्रैप लगाए गए। इसके अलावा हिमालयी मोनाल, स्नो कॉक, स्नो पार्ट्रिज, गोल्डन ईगल और लैमरगायर जैसे दुर्लभ पक्षियों की उपस्थिति भी दर्ज की गई। टीम ने औषधीय पौधों, लाइकेन, कीट-पतंगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का भी अध्ययन किया।

अभियान की वापसी पर अध्ययन दल ने लाता गांव में स्थानीय ग्रामीणों से संवाद कर जैव विविधता संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और इको-टूरिज्म में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा की। अभियान का नेतृत्व भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व संकायाध्यक्ष एवं निदेशक प्रो. जी.एस. रावत ने किया, जबकि इसका संचालन नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के उप वन संरक्षक अभिमन्यु के निर्देशन में किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस अध्ययन से नंदादेवी क्षेत्र की जैव विविधता संरक्षण रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।