चमोली जनपद में जंगलों में लगातार बढ़ रही आग की घटनाओं के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। बद्रीनाथ वन प्रभाग क्षेत्र के बिरही के पास आग बुझाने गए एक फायर वॉचर की चट्टान से गिरने के कारण मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। नाराज परिजनों ने वन विभाग के अधिकारियों का घेराव करते हुए मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है।
जनपद में इन दिनों अलग-अलग स्थानों पर जंगलों में भीषण आग लगी हुई है, जिससे चारों ओर धुंध और धुएं का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग आग पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। हालांकि विभाग की ओर से ग्रामीण स्तर पर फायर वॉचरों की तैनाती की गई है, लेकिन बिना पर्याप्त संसाधनों के वन कर्मी और फायर वॉचर जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार देर रात वन विभाग की टीम एक दर्जन से अधिक लोगों के साथ बिरही क्षेत्र में जंगल की आग बुझाने पहुंची थी। इसी दौरान फायर वॉचर राजेंद्र सिंह (43 वर्ष) पुत्र नंदन सिंह निवासी पाखी-जलग्वाड़ की चट्टान से गिरने के कारण मौत हो गई। सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारी और मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि राजेंद्र पिछले आठ वर्षों से वन विभाग के साथ फायर वॉचर के रूप में कार्य कर रहे थे। वह अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे।
क्या होता है फायर वॉचर
वन विभाग द्वारा जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने और कम करने के लिए ग्रामीण स्तर पर अस्थाई रूप से फायर वॉचर नियुक्त किए जाते हैं। ये केवल फायर सीजन के दौरान कार्य करते हैं। विभाग की ओर से इन्हें लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक का भुगतान किया जाता है।
परिजनों की मांग
मृतक के परिजनों का कहना है कि राजेंद्र एक गरीब परिवार से थे और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिजनों ने मांग की है कि परिवार को उचित क्षतिपूर्ति दी जाए तथा मृतक की पत्नी को नौकरी दी जाए ताकि बच्चों की शिक्षा और परिवार का पालन-पोषण हो सके।
क्या बोले जनप्रतिनिधि
स्थानीय जनप्रतिनिधि कमल किशोर डिमरी ने कहा कि सरकार ने फायर वॉचर तो नियुक्त किए हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भीषण जंगल की आग के बीच वन कर्मी और फायर वॉचर बिना संसाधनों के अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। आग बुझाने के लिए जरूरी उपकरण और व्यवस्थाएं नदारद हैं। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।
क्या बोले अधिकारी
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फायर वॉचर स्थायी कर्मचारी नहीं होते और उन्हें केवल तीन महीने के फायर सीजन के लिए तैनात किया जाता है। विभाग की ओर से उनका जोखिम बीमा कराया जाता है। अधिकारियों के अनुसार इस तरह की दुर्घटना में बीमा के तहत लगभग 10 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जा सकती है।
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