कांग्रेस के लखपत बुटोला के सामने भाजपा के कई चेहरे; भंडारी की दावेदारी से लेकर संगठन के पुराने चेहरों तक पर निगाहें
चमोली। बद्रीनाथ विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव की दस्तक से पहले ही सियासी तापमान बढ़ने लगा है। कांग्रेस जहां मौजूदा विधायक लखपत बुटोला के नाम को लेकर मजबूत दिखाई दे रही है, वहीं भाजपा में टिकट की दौड़ ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। खास बात यह है कि इस बार मुकाबला केवल चुनावी मैदान में नहीं, बल्कि टिकट की चौखट पर भी दिलचस्प होने के संकेत दे रहा है।
कांग्रेस की ओर से मौजूदा विधायक लखपत बुटोला को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। ऐसे में यदि पार्टी दोबारा उन पर भरोसा जताती है तो कांग्रेस के पास क्षेत्र में अपना चेहरा पहले से मौजूद रहेगा। दूसरी ओर भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बद्रीनाथ की सियासी बाजी किस चेहरे के नाम खेली जाए?
भंडारी की एंट्री ने बढ़ाई भाजपा की अंदरूनी हलचल
कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी का नाम बद्रीनाथ की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले चेहरों में शामिल है। भाजपा में उनकी एंट्री के बाद से ही यह सवाल उठता रहा है कि पार्टी उन्हें भविष्य में किस भूमिका में इस्तेमाल करती है।
अब बद्रीनाथ विधानसभा के प्रभारी के तौर पर अनिल बलूनी की भूमिका के बीच भंडारी के संभावित टिकट को लेकर चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ा है। हालांकि टिकट का फैसला अभी दूर है और अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को ही करना है, लेकिन सियासी गलियारों में भंडारी की दावेदारी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
मूल कार्यकर्ता बनाम आयातित चेहरा—भाजपा के सामने बड़ी चुनौती
भाजपा के लिए बद्रीनाथ सीट पर टिकट तय करना आसान नहीं माना जा रहा। पार्टी के भीतर लंबे समय से सक्रिय स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की अपनी दावेदारी है। वहीं दूसरी ओर चुनावी समीकरणों के लिहाज से मजबूत माने जाने वाले चेहरों पर भी पार्टी नेतृत्व की नजर हो सकती है।
2024 के बद्रीनाथ विधानसभा उपचुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं को लेकर पार्टी के कुछ पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी की चर्चा भी सामने आई थी। ऐसे में 2027 में टिकट वितरण के समय ‘मूल कार्यकर्ता’ बनाम ‘बाहर से आए मजबूत चेहरे’ का सवाल भाजपा के लिए अहम राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
टिकट की दौड़ में कई नाम
भाजपा के संभावित दावेदारों की सूची भी छोटी नहीं है। राजनीतिक हलकों में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रघुवीर बिष्ट, कृष्णमणि थपलियाल, पूर्व जिला पंचायत एवं सहकारी बैंक अध्यक्ष गजेंद्र रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण खत्री और बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष एवं जोशीमठ नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती जैसे नाम चर्चा में हैं।
इनमें से किसके पक्ष में संगठन का समीकरण बैठता है और किस चेहरे को क्षेत्रीय राजनीतिक गणित में बढ़त मिलती है, यह आने वाले समय में साफ होगा।
महेंद्र भट्ट के नाम की भी सियासी चर्चा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और चमोली से दो बार विधायक रह चुके राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चाओं में कभी-कभार सामने आता रहा है। हालांकि उनके नाम को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक संकेत नहीं हैं, लेकिन चमोली की राजनीति में उनकी पकड़ को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक इस संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं।
उक्रांद ने भी बढ़ाई सक्रियता
बद्रीनाथ की सियासी पटकथा में उत्तराखंड क्रांति दल भी अपना किरदार तलाश रहा है। पार्टी से जुड़े संभावित चेहरों में लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय बिरजू सजवाण, पूर्व कुलपति डॉ. यू. रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिक्षक संघ कमल किशोर डिमरी के नाम चर्चा में हैं।
2027 में किसके हाथ लगेगा बद्रीनाथ का ‘बाजीगर’ कार्ड?
फिलहाल बद्रीनाथ की सियासत में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि कांग्रेस के सामने मौजूदा विधायक का चेहरा है और भाजपा के सामने चेहरों की लंबी कतार। भाजपा के लिए असली चुनौती सिर्फ जिताऊ प्रत्याशी तलाशना नहीं, बल्कि ऐसा चेहरा चुनना होगी जिसे संगठन, पुराने कार्यकर्ता और स्थानीय राजनीतिक समीकरण एक साथ स्वीकार कर सकें।
यही वजह है कि बद्रीनाथ में 2027 का चुनाव अभी भले दूर हो, लेकिन टिकट की सियासी दौड़ ने मैदान पहले ही गर्म कर दिया है। अब देखना यह होगा कि भाजपा भंडारी जैसे चर्चित चेहरे पर दांव लगाती है, किसी पुराने संगठनात्मक चेहरे को मौका देती है या फिर कोई ऐसा नया नाम सामने लाती है जो सभी समीकरणों को चौंका दे।
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